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किशनगंज में 30 पंचायत सचिव निलंबित, अनधिकृत अनुपस्थिति और हड़ताल से सरकारी योजनाएं प्रभावित, प्रशासन सख्त

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किशनगंज जिले में अनधिकृत अनुपस्थिति, हड़ताल और सरकारी कार्यों में बाधा डालने के आरोप में 30 पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है। जिला प्रशासन ने 24 घंटे में आरोप पत्र देने का आदेश दिया है।

किशनगंज/आलम की खबर:किशनगंज जिले में जिला प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत 30 पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अनधिकृत अनुपस्थिति, कार्य बहिष्कार (हड़ताल) और सरकारी कार्यों में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोपों के आधार पर की गई है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।

जिला प्रशासन के अनुसार, पिछले कई दिनों से पंचायत सचिवों की लगातार अनुपस्थिति के कारण ग्रामीण स्तर पर कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का कार्य प्रभावित हो रहा था। जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गमन, परिवारिक दस्तावेजों का सत्यापन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जुड़े कार्य, वंशावली निर्माण, तथा अन्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं। आम जनता को बार-बार प्रखंड और पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, जिससे लोगों में असंतोष की स्थिति भी देखी जा रही थी।

इसके अलावा 15वें वित्त आयोग और षष्ठम राज्य वित्त आयोग की योजनाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ा था। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों की गति भी धीमी पड़ गई थी। ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे थे, जिससे विकास योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही थी।

प्रशासन ने यह भी बताया कि भारत की आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों पर भी इस स्थिति का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा को गंभीर माना गया है।

जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिहार ग्राम पंचायत सचिव (नियुक्ति, अधिकार एवं कर्तव्य) नियमावली 2011 के तहत सभी पंचायत सचिवों का यह दायित्व है कि वे नियमित रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। लगातार अनुपस्थित रहना और कार्य बहिष्कार करना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है।

इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन है। इसी आधार पर पंचायती राज विभाग, बिहार पटना के निर्देश पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।

निलंबन अवधि के दौरान सभी 30 पंचायत सचिवों को केवल जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही प्रशासन ने अलग-अलग प्रखंडों में उनके लिए अस्थायी मुख्यालय भी निर्धारित कर दिए हैं ताकि प्रशासनिक कार्यों में कोई रुकावट न आए।

जिलाधिकारी विशाल राज ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को निर्देश दिया है कि निलंबित पंचायत सचिवों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर प्रपत्र ‘क’ के तहत आरोप पत्र तैयार कर जिला पंचायत शाखा को उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन का कहना है कि आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनुशासनहीनता या कार्य बहिष्कार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

इस कार्रवाई के बाद जिले में प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का माहौल बना हुआ है और इसे एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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